Friday, September 14, 2018

热带海域人工岛建设的创意

英国《卫报》周二报道说,一建筑师表示将在热带地区建设利用海温和海流等自然资源为能源供给的人工岛,以此来竞争英国富豪理查德•布兰森设立的价值为2千5百万美元的抗击全球变暖的创新概念奖 (维珍地球奖)。
该设计师提议从跨越加勒比海,南中国海,印度洋到西非的热带海域上搭起漂浮的平台来建设这些人工岛屿。

在每个岛的中心将有一座可以把海水热能转化为电力以及把海水转化为饮用水的工厂;海岛下面设有涡轮机,它们将开发深海的海流能量;同时,漂浮在海岛旁的设施来利用海波的能量。

为抑制全球变暖的恶化,布兰森正寻求创新做法,并鼓励全球的发明者在2010年2月前提交他们的建议来角逐他设立的维珍地球奖。中外对话"的4名撰稿人被英国《卫报》选入“50名能拯救地球的人”。
跻身“最后的绿色英雄”之列的有:潘岳,中国环保局(
英国三十余年以来的首座火电站项目获得通过,环保人士警告说该项目将破坏政府抗击全球暖化的努力。
英国西南部肯特郡的麦德伟市政厅通过了德国易用公司提议的位于 村的火电站项目。

易用公司认为英国需要广泛的能源来源以满足未来北海石油和天然气减产时的能源需求。

但是环保人士对此态度不甚乐观。“地球之友”的能源倡议者R r说道:“ 火电站将破坏政府做出的在2020年前达到欧洲标准,将可更新能源提升到能源总结构的20%的承诺。”

“如果政府要严肃应对气候变化,就必须驳回提议,并增加在其他清洁能源上的投资。”
)副局长;马军,中国公众与环境研究中心主任;约金•阿善塔姆,印度全国贫民窟居民联合会和贫民窟居民国际的主席;以及特里•塔米宁,能源及气候政策顾问,加利福尼亚州州长阿诺德•施瓦辛格的前环境顾问。

2008". 这张名单上来自19个不同国家的人选中有三分之一是发展中国家的。这就说明了——引用《卫报》的原话——“将来,草根阶层的智慧将和金钱、技术并重”。报道称,这份名单给了“大家一个概念,我们有大量的代表着科学和社会革命繁荣昌盛的人,这让我们带着希望进入2008年。”

这些人中还包括施正荣,中国太阳能电力公司的创始人;电影制作人贾樟柯;马来西亚“绿色摩天楼”建筑设计师杨经文;英国土木工程师彼得•黑德(
《路透社》周四引据一位高官报道说,中国很高兴美国能重回气候变化谈判,但美国必须做更多努力以抗击气候变化。
中国气候变化大使于庆泰说道:“美国是排放大国,不仅从总排量还是人均排量来说均是如此。美国有先进的技术和充足的资金来抗击气候变化。”

“所以在气候变化议题上,美国应该扮演一个更积极、更有建设性的角色。”),他是世界上首座可持续发展生态城东潭的主计划工程师。
印度塔塔汽车公司设计和制造的世界上最廉价汽车将于本周揭晓,但是关心印度各地日益严重的污染的环保人士们对此发出了警告。
英国《观察家报》的一份报道引用塔塔公司说道:“‘人民的车’将创造一个‘前所未有的新兴汽车市场’,印度崛起的中产阶级将可购买此车。”

但是环保人士对鼓励汽车拥有量达到前所未想的水平表示担忧。报道引用印度德里科学与环境中心的 说道:“目前汽车公司中有着这样一股减低车价,以使更多人能够买车的狂潮。”

“如果汽车拥有量急剧增加,这将是个定时炸弹。如果汽车公司如此大幅地降价,怎能保证汽车达到安全标准和排放指标?目前就此尚未有明确答案。”
国家媒体引据国务院报道说,中国将在2030年前耗尽其可用水资源,在全球气温上升的背景下,政府官员们应做好最坏打算。
国务院下达的一份指令指出:“近年经济和社会的发展引发了水需求的增加,在全球暖化的影响下,旱灾和水稀缺的状况正急剧恶化。”

“全面考虑到节水局面,我国的用水将在2030年前达到或接近可利用的水量极限,抗旱工作将更加艰难。”

Monday, September 10, 2018

गाय-भैंस क्यों हैं पर्यावरण के लिए ख़तरनाक

जलवायु परिवर्तन से चिंतित वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों के लिए लंबे वक़्त से गाय की गैस और डकार चिंता के विषय बने हुए हैं.
वायुमंडल में हानिकारक मीथेन की अधिक मात्रा के लिए गाय-भैंसों की डकार और उनके पेट से निकलने वाली गैस को भी ज़िम्मेदार माना जाता है.
वैज्ञानिक मीथेन का उत्सर्जन रोकने के लिए गायों के खाने में सुधार करने की कोशिश करते रहे हैं. उन्हें लहसुन, ओरेगैनो, जाफ़रान या अन्य सब्ज़ियां खिलाकर उसका असर देखने की कई कोशिश की गई है.
गायों की गैस को कैसे कम हानिकारक बनाया जाए- कैलिफ़ोर्निया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हाल में शोध के ज़रिए इसका रास्ता निकाल लिया है.
वैज्ञानिकों का कहना है कि गाय को समुद्री शैवाल खिलाने से उनकी गैस में मीथेन की मात्रा कम हो सकती है और इससे पर्यावरण की रक्षा हो सकती है.
इस शोध के तहत वैज्ञानिकों ने क़रीब एक दर्जन दुधारू गायों को खाने में समुद्री शैवाल खिलाया. इसके बाद उनकी डकार और गैस से उत्पन्न होने वाली मीथेन में 30 फ़ीसदी की कमी पाई गई.
शोध में शामिल विश्वविद्यालय के पशु वैज्ञानिक अरमियास केब्रियाब के अनुसार, "शोध के नतीजे देख कर मुझे आश्चर्य हुआ. मुझे अंदाज़ा नहीं था कि थोड़ी मात्रा में समुद्री शैवाल खिलाने से चमत्कार भी हो सकता है."
उनका कहना है कि शोध के नतीजों से सीख लेते हुए उनकी टीम अब छह महीने तक भैसों को समुद्री शैवाल खिला कर उसका असर देखना चाहती है. ये शोध इसी साल अक्टूबर में शुरू किया जाएगा.
इलिनॉय विश्वविद्यालय में पशु वैज्ञानिक माइकल हुचेन्स कहते हैं, "अगर हम खाने में ज़रा सा बदलाव कर के वायुमंडल में मीथेन की मात्रा कम कर सकें तो इससे कार्बन उत्सर्जन पर सकारात्मक असर पड़ेगा."
संयुक्त राष्ट्र की फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गेनाइज़ेशन की 2014 की रिपोर्ट के अनुसार गाय, बकरी और भेड़ जैसे चार पेट वाले जानवर दिन भर खाना चबाते यानी जुगाली करते रहते हैं और डकार मारते हैं.
पहले पेट रूमेन में लाखों की संख्या में जीवाणु रहते हैं जो घास और पत्तियों जैसे फाइबर युक्त खाने को छोटे टुकड़ों में तोड़ कर उन्हें हज़म करना आसान बनाते हैं. इस प्रक्रिया में गाय के पेट से मीथेन गैस निकलती है.
नवंबर 2006 में आई संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार जलवायु परिवर्तन के लिए ज़िम्मेदार कार्बन डाईऑक्साइड का जितना उत्सर्जन गाड़ियों या कारखाने के धुंए से होता है उससे कहीं अधिक गाय के पेट से होता है. इस रिपोर्ट के अनुसार वायुमंडल को सबसे अधिक ख़तरा गाय और भैसों से है.
कारों से कार्बन डाईऑक्साईड का उत्सर्जन होता है जबकि गाय से मीथेन का. और कार्बन डाईऑक्साईड के मुक़ाबले मीथेन हमारे वायुमंडल के लिए कई गुना हानिकारक है. ये ग्रीनहाऊस गैसों को अधिक मात्रा में बांध कर रखती है और यह ग्लोबल वार्मिंग का बड़ा कारण है.
न्यूज़ीलैंड ने तो गाय-भैसों की गैस पर टैक्स लगाने का भी प्रस्ताव दे दिया था. किसानों ने इसका जमकर विरोध किया, लेकिन इस प्रस्ताव ने जलवायु परिवर्तन और गाय-भैंसों के योगदान को ज़रूर स्पष्ट कर दिया.
मीथेन का उत्सर्जन कम करने की कोशिशों को इसी बात से जाना जा सकता है 2016 में कैलिफ़ोर्निया में गायों से निकलने वाली मीथेन को गाड़ियों में इस्तेमाल करने की कोशिशों की बातें होने लगीं थी.
साथ ही दूध के स्वाद को बरकरार रखते हुए उनके खाने को भी रेग्युलेट करने के शोध पर भी चर्चाएं हुईं.
एशियन ऑस्ट्रेलियन जर्नल ऑफ़ एनिमल साइंसेज में 2014 में प्रकाशित एक शोध के अनुसार 2010 तक गायों के कारण मीथेन उत्पादन की मात्रा लगातार बढ़ी है और दुनिया के अन्य हिस्सों में पाई जाने वाली गायों की तुलना में भारतीय गाय इसमें आगे हैं.
2012 में हुई 19वें पशुधन गणना के अनुसार भारत में क़रीब 51 करोड़ गाय, भैंसे, बकरी, भेड़ें और घोड़े हैं.